गोवर्धनमठ पुरी में आज द्वितीय दिवस की आर्थिक संगोष्ठी में शामिल होंगे अर्थशास्त्री
भुवन वर्मा बिलासपुर 7जुलाई 2020

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जगन्नाथपुरी — पूर्वाम्नाय गोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर पूज्यपाद श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में श्रीगोवर्धनमठ पुरी में गुरुपूर्णिमा के परिप्रेक्ष्य में दिनांँक 06 जुलाई से 08 जुलाई 2020 तक प्रतिदिन शाम 06:00 से रात्रि 08:00 बजे पर्यन्त बेबीनार के माध्यम से अर्थ की परिभाषा और अर्थोपार्जन के उद्देश्य , कृषि- गोरक्ष्य- वाणिज्यादि अर्थोपार्जन के विविध स्रोत , आर्थिक विपन्नता तथा अनावश्यक विषमता के निवारण के अमोघ उपाय , अर्थ के संचय, संरक्षण, उपभोग और वितरण की स्वास्थ विधा विषयों पर तीन दिवसीय आर्थिक संगोष्ठी आयोजित किया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन भारत के प्रमुख अर्थशास्त्री अपना विचार रख रहे हैं। कल 06 जुलाई को देश के जाने-माने अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी ने कृषि -गोरक्ष्य एवं वाणिज्यादि अर्थोपार्जन के स्रोत विषय पर , प्रो० गिरीशचंद्र त्रिपाठी , एडीएन वाजपेई एवं प्रो रेखा आचार्य ने अर्थ की परिभाषा एवं अर्थोपार्जन का उद्देश्य विषय पर अपने भाव रखे। प्रथम दिवस में अतिथि अर्थविदों के व्याख्यान का सार था कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था ही भारत को आत्मनिर्भर बना सकती है। अत: बारह महीनों कृषि उत्पादन होता रहे इसके लिये सिंचाई , उत्तम बीज , प्राकृतिक खाद , देशी पद्धति से निर्मित हानिरहित कीटनाशक की व्यवस्था सरकार के द्वारा सुनिश्चित की जानी चाहिये एवं कृषि उत्पाद के उचित मूल्य हेतु स्थानीय स्तर पर खरीदने के लिये बाजार भी उपलब्ध हो ऐसी व्यवस्था की जाये। संगोष्ठी के अंत में पुरी शंकराचार्य जी ने विषय को समेकित करते हुये उद्धरण दिया कि प्रयोजन ही अर्थ है तथा प्रयोजन की सिद्धि भी अर्थ है। पृथ्वी अर्थ है , जल अर्थ है , तेज अर्थ है , वायु अर्थ है , आकाश अर्थ है , सभी अर्थ परम अर्थ में समाहित हैं । परम अर्थ सच्चिदानन्द सर्वेश्वर हैं। अंत में पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज जी ने कहा कि “जीविका जीवन के लिये है, जीवन जीविका के लिये नहीं, जीवन है जीवनधन जगदीश्वर की प्राप्ति के लिये’।
इसी कड़ी में अर्थ संगोष्ठी के द्वितीय दिवस आज शाम डाॅ० विनय जोशी शोध निदेशक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय भोपाल , प्रो. मोहनलाल क्षिप्रा पूर्व कुलपति अटल बिहारी वाजपेई हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल , प्रो मनोज पंत , निदेशक आई आई एफ टी , डॉ अरुणा कुसुमाकर प्राध्यापक शासकीय संस्कृत महाविद्यालय इंदौर वक्ता होंगे। उपरोक्त वक्ताओं के उद्बोधन के पश्चात पुरी शंकराचार्य जी निर्धारित विषय पर वेदनिहित शास्त्रपरक व्याख्यान भी देंगे।
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