वर्ष का पहला सूर्यग्रहण कल, मंदिरों के पट रहेंगे बंद

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भुवन वर्मा बिलासपुर 20 जुन 2020

रायपुर — इस वर्ष का पहला सूर्यग्रहण कल आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या रविवार 21 जून को लग रहा है। इसके पहले वलयाकार ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को दक्षिण भारत से और आंशिक ग्रहण के रूप में देश के विभिन्न हिस्सों से देखा गया था। अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में अगले दशक में दिखाई देगा, जो 21 मई 2031 को होगा, जबकि 20 मार्च 2034 को पूर्ण सूर्यग्रहण देखा जायेगा। इस संबंध में जानकारी देते हुये ज्योतिषाचार्य पं० देवीप्रसाद शुक्ला ने बताया कि महाबीर पंचांग के अनुसार खंडग्रास सूर्यग्रहण स्पर्श प्रात: 10:31 बजे , मध्य दोपहर 12:18 बजे एवं मोक्ष दोपहर 02:04 मिनट पर होगा। यह सूर्यग्रहण मृगशिरा नक्षत्र में प्रारंभ होकर आर्द्रा नक्षत्र में समाप्त होगा। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों को सूतक काल मानते हैं। सूर्यग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे। सूतक ग्रहणकाल में मूर्ति दर्शन , पूजा , स्पर्श , खानपान , निद्रा , तेलमर्दन आदि वर्जित होता है।इसके अलावा झूठ , कपट , वृथा अलाप , नाखून काटने से परहेज़ करना चाहिये। ग्रहणग्रस्त सूर्य बिम्ब को नंगी आँखों से कदापि ना देखें। वैल्डिंग वाले काले ग्लास में से देख सकते हैं। वृद्ध , रोगी , बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को यथा अनुकूल भोजन व दवाई आदि लेने में कोई दोष नही है। ग्रहण काल में मन तथा बुद्धि पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचने के लिये जप, ध्यानादि करना चाहिये। सूर्यग्रहण के समाप्त होने के बाद किसी पवित्र नदी यथा गंगा, नर्मदा, रावी, यमुना, सरस्वती, इत्यादि में स्नान करें। यह संभव ना हो तो तालाब, कुयें या बावड़ी में स्नान करें। यदि यह भी संभव ना हो तो घर पर रखे हुये तीर्थ जल मिलाकर स्नान करना चाहिये।इसके बाद मंदिर और पूजा घरों को खोलकर मूर्तियों में गंगाजल छिड़क कर उन्हें पवित्र करके विधिवत पूजा पाठ अनुष्ठान पहले की तरह शुरू करनी चाहिये ततपश्चात पात्र व्यक्ति को यथशक्ति दान भी करने की परंपरा है।

इस सूर्यग्रहण का आरंभ और समापन का समय भारत में अलग अलग स्थानों पर अलग अलग रहेगा। यह सूर्य ग्रहण विश्व के कई देशों में दिखाई देगा जिसने भारत चीन अफ्रीका कांगो इथोपिया नेपाल पाकिस्तान आदि है। ग्रहणकाल में राशियों का फल निम्नानुसार होगा — मेष (श्री) , वृष (क्षति) , मिथुन (घात) , कर्क ( हानि) , सिंह (लाभ) , कन्या (शुभ) ,तुला (अपमान) ,वृश्चिक (कष्ट) , धनु(पीड़ा) ,ममकर (सौख्य) ,कुंभ (चिंता) ,मीन (व्यथा)। सूतक एवं ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, निद्रा, तेल मर्दन वर्जित है। झूठ-कपट आदि वृथा अलाप, नाखून काटने आदि से परहेज करना चाहिए। वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को यथा अनुकूल भोजन या दवाई आदि लेने में कोई दोष नहीं है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में सब्जी काटने, शयन करने, पापड़ सेकने आदि उत्तेजक कार्यों से परहेज करना चाहिये तथा धार्मिक ग्रंथ का पाठ करते हुये प्रसन्नचित रहें। इससे भावी संतति स्वस्थ एवं सद्गुणी होती है। दूध, घी, तेल, पनीर, अचार, मुरब्बा एवं भोजन सामग्रियों में तिल, कुश या तुलसी पत्र डाल देने से ये ग्रहण काल में दूषित नहीं होते। सूखे खाद्य पदार्थ में तिल या कुशा डालने की आवश्यकता नहीं है।

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

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