साढ़े पांच रूपये में कैसे मिलेगा बच्चों को पौष्टिक आहार: मीनू के आधार पर नहीं मिल रहा मध्यान्ह भोजन-चार साल से नहीं मिल रहा अंडा

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हेमंत कश्यप ब्यूरो चीफ जगदलपुर की रिपोर्ट

जगदलपुर। क्या आप 182 रूपये आठ पैसे से 32 बच्चों को पौष्टिक भोजन करवा सकते हैं? आप कहेंगे नहीं, किन्तु केंद्र और राज्य सरकार के अंशदान से संचालित मध्यान्ह भोजन योजना के तहत इतनी ही राशि प्रायमरी स्कूल के प्रति बच्चे को दी जा रही है इसलिए बच्चों को दिए जा रहे भोजन की पौष्टिकता पर सवाल उठ रहे हैं।

मिड डे राशि वृद्धि
वर्ष राशि
2020 – 5.10 रूपये
2021 – 5.29 रूपये
2022 – 5.29 रूपये

2023 – 5.69 रूपये

एक बच्चे को मात्र 5 रूपए 69 पैसे
बस्तर जिला के जगदलपुर जनपद पंचायत अंतर्गत 209 प्रायमरी स्कूलों में 13083 और 124 मिडिल स्कूलों में 7955 बच्चे हैं। यहां पढ़ रहे बालक – बालिकाओं को महिला समूहों द्वारा मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है। मिड डे के नाम पर प्रायमरी स्कूल के प्रत्येक बच्चे को पांच रूपये 69 पैसे तथा मिडिल स्कूल के बच्चे को आठ रूपये 17 पैसे दिया जा रहा है।
अपना समझ खर्च कर रही समूह
मध्यान्ह भोजन की अव्यस्था को समझने के लिए प्राथमिक शाला कैका चेरबहार का उदाहरण लीजिए। यहां 32 बच्चे पढ़ रहे हैं। इनके लिए भोजन पकाने प्रति माह मात्र 4369 रूपये 92 पैसे दिए जाते हैं। इस हिसाब से बत्तीस बच्चों का भोजन पकाने के लिए प्रति दिन मात्र 182 रूपये 8 पैसे मिलता है। जबकि प्रतिदिन 40 रूपये का आलू, 130 रूपये का दाल, 40 रूपये की हरी सब्जी और 30 रूपये मसाला पर खर्च हो जाता है। अशोक महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष कमला और सचिव गौरीमनी का कहना है कि सरकार जितनी राशि मध्यान्ह भोजन के लिए दे रही है। लगभग उतनी ही राशि वे अपनी तरफ़ से खर्च करती हैं तब भोजन पकता है। राशन की दुकान से बस चावल देने से यह योजना नहीं चल सकती और न ही बच्चों को बेहतर पौष्टिक आहार दिया जा सकता है। चार साल से बच्चों को अंडा भी नहीं दिया जा रहा है। सप्ताह में एक दिन मुख्यमंत्री अमृत योजना से तहत बच्चों को सोया दूध मिल रहा है।
मध्यान्ह भोजन का मीनू सोमवार- चना, आलू, दाल- चावल।
मंगलवार – हरी सब्जी, आलू, दाल- चावल।
बुधवार- मटर, आलू, दाल – चावल।
गुरुवार – हरी सब्जी, आलू दाल चावल।
शुक्रवार – चना, आलू, दाल- चावल।

शनिवार- सोया बड़ी, आलू, दाल- चावल।

सही प्रतिफल नहीं मिला
मध्यान्ह भोजन योजना वर्ष 1994 में प्रारंभ हुई थी लेकिन समयानुसार प्रति बच्चे के हिसाब से जितनी राशि बढ़ाई जानी चाहिए, वह नहीं हो पाई। बीते चार वर्षों में मात्र 59 पैसे की वृध्दि की गई है। जो पर्याप्त नहीं है।
विवाद खा गया अंडा

ग्राम पुसपाल के विश्वनाथ सेठिया, नामगुर के दीपक निषाद, उलनार के चरण पुजारी, जाटम के वयोवृद्ध तुलसी राम देवांगन बताते हैं कि स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन में अंडा देने की योजना अच्छी थी, किंतु कुछ लोगों ने अंडा को मांसाहार बता इसे बंद करवा दिया है। अंडा वितरण फिर से शुरु किया जाना चाहिए।

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