सिरिशा बांदला बनेगी भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष यात्री

भुवन वर्मा बिलासपुर 04 जुलाई 2021

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

वाशिंगटन – देश के लिये यह बड़े ही गौरव की बात है कि कल्पना चावला , सुनीता विलियम्स के बाद अब सिरिशा बांदला (34 वर्षीया) अंतरिक्ष की खतरनाक सफर पर जा रही है। सिरिशा रिचर्ड ब्रैंसन की स्पेस कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक के अंतरिक्ष यान वर्जिन ऑर्बिट में बैठकर 11 जुलाई को अंतरिक्ष की सैर पर जायेंगी। इस अंतरिक्ष उड़ान में इसके संस्थापक समेत छग लोग शामिल होंगे। यह अंतरिक्ष यान न्यू मेक्सिको से उड़ान भरेगा जिसमें चालक दल के सभी सदस्य कंपनी के कर्मचारी होंगे। सिरिशा का काम रिसर्च से संबंधित होगा।

इस यात्रा पर जाने वाले छह लोगों में दो महिलायें हैं , सिरिशा के अलावा एक अन्य महिला बेश मोसिस भी है। सिरिशा बांदला रिचर्ड ब्रैनसन के पांच अंतरिक्ष यात्रियों में से एक है। वे भारतीय मूल की दूसरी ऐसी और पहली तेलुगु महिला है जो अंतरिक्ष के सफर पर जा रही है , जबकि वह अंतरिक्ष में जाने वाली चौथी भारतीय होंगी। सिरिशा स्पेस कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक की गवर्नमेंट अफेयर्स एंड रिसर्च ऑपरेशन्स की वाइस प्रेसीडेंट हैं। सिरिशा ने यह पद सिर्फ छह सालों में हासिल की है। कल्पना चावला के बाद सिरिशा बांदला भारतीय मूल की दूसरी ऐसी महिला होंगी जो अंतरिक्ष के सफर पर जा रही हैं। भारत की ओर से राकेश शर्मा सबसे पहले अंतरिक्ष में गये थे , इसके बाद कल्पना चावला गयी थी लेकिन दुर्भाग्यवश स्पेश शटल कोलंबिया की दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी।

गौरतलब है कि सिरिशा बांदला का जन्म आंध्रप्रदेश (भारत) के गुंटूर में हुआ था। बाद में वह अपने परिवार के साथ अमेरिका में ही स्थायी रूप से शिफ्ट हो गई। वह टेक्सास के ह्यूस्टन में पली बढ़ी है , इसलिये उन्होंने राकेट्स और स्पेसक्राफ्ट्स को नजदीक से आते-जाते देखा है। उन्होंने पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिकल/एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग से ग्रैजुएट किया है। इसके बाद जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली। उन्होंने वर्ष 2015 में वर्जिन को ज्वाइन किया था और इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा। अभी वह वर्जिन ऑर्बिट के वॉशिंगटन ऑपरेशंस को भी सम्हाल रही हैं। इसके अलावा सिरिशा अमेरिकन एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी एंड फ्यूटर स्पेस लीडर्स फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं , साथ ही वह पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के यंग प्रोफेशनल एडवाइजरी काउंसिल की सदस्या भी है। वे उत्तरी अमेरिका का सबसे पुराना और बड़ा इंडो-अमेरिकन संगठन तेलुगू एसोसियेशन आफ नार्थ अमेरिका से भी जुड़ी हुई है , कुछ साल पहले ही इस संगठन ने सिरिशा को यूथ स्टार अवार्ड से नवाजा है। उनके दादा कृषि विज्ञानी बांदला रगहिया ने पोती की इस उपलब्धि पर कहा है कि मैंने हमेशा उसमें कुछ बड़ा हासिल करने का उत्साह देखा है और आखिरकार वह अपना सपना पूरा करने जा रही है। मुझे विश्वास है कि वह इस मिशन में सफलता हासिल कर पूरे देश को गर्व महसूस करायेगी। वहीं सिरिशा के पिता डाक्टर मुरलीधर भी एक वैज्ञानिक और अमेरिकी सरकार में सीनियर एग्जीक्यूटिव सर्विसेज के सदस्य हैं। सिरिशा के अंतरिक्ष में जाने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों की भीड़ लग गई है। लोग इन्हें भारत , आंध्रप्रदेश और गुंटूर सभी जगहों से जोड़कर गर्व महसूस कर रहे हैं।

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