धान ही है कृषि उपज मंडी की जान
भुवन वर्मा बिलासपुर 12 अगस्त 2020
त्योहारी मांग, मजदूरी भुगतान और घरेलू जरूरतों ने बढ़ाई आवक
भाटापारा- त्योहारों की तैयारी, मजदूरी भुगतान और घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए किसान अब आड़े वक्त के लिए रखी कृषि उपज की बिक्री करने लगे हैं। यह कृषि उपज मंडी मैं 29 हजार 640 बोरा धान दलहन और तिलहन की आवक के बाद दिखाई दिया। 11 अगस्त की इस आवक के बाद 12 अगस्त को जन्माष्टमी के अवकाश के दिन भी 13 अगस्त के लिए देर शाम तक 8 हजार बोरा कृषि उपज के आवक होने की खबर है।
करोना कॉल में बढ़ते लॉकडाउन के साथ जरूरतों का सीमित किया जाना तेजी से दिखाई दे रहा है। बाजार में कमजोर ग्राहकी इसे साबित कर रही है लेकिन एक बदलाव यह जरूर देखा जा रहा है कि दैनिक आवश्यकता वाली उपभोक्ता सामग्रियों की खरीदी की मात्रा में तेजी से बढ़ोतरी आ रही है। बाजार सूत्रों का कहना है कि कभी भी लॉकडाउन की आशंका के बीच ऐसी उपभोक्ता सामग्रियों की खरीदी मैं तेजी आई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से यह मांग कुछ ज्यादा ही है जहां खेती किसानी का काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहा है। इस तरह की खरीदी के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन विपदा की स्थिति के लिए बचा कर रखी गई कृषि उपज का विक्रय किया जाकर हासिल किया जा रहा है। यह प्रमाणित होता है कृषि उपज मंडी में पहुंच रही भरपूर आवक से। कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन दलहन तिलहन और धान की आवक 29 हजार 640 बोरा की रही।

अभी भी धान ही आगे
ःमंडी की जान है धान। मंगलवार की कुल आवक 29 हजार 640 बोरा कृषि उपज में से अकेले धान की हिस्सेदारी 26 हजार आठ सौ बोरा की रही जबकि मसाला दलहन और तिलहन में आवक 1687 बोरा का होना दर्ज किया गया है। भाव में देखे तो महामाया धान मोटा धान की सभी किस्मों में सबसे ज्यादा तेज है जबकि बारीक धान में सियाराम आगे चल रहा है। दलहन में अरहर तो तिलहन में सरसों आगे चल रही है। 12 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवकाश के बाद भी 13 अगस्त के लिए आवक देर शाम तक लगभग 8 हजार बोरा की हो चुकी थी। इसमें भी धान की मात्रा सबसे ज्यादा है।
इसलिए बढ़ रही आवक
अगस्त माह से त्योहारों का सीजन चालू हो जाता है। इसमें रक्षाबंधन तो लॉक डाउन की भेंट चढ़ चुका है। अब बारी है श्री कृष्ण जन्माष्टमी की, फिर गणेश उत्सव और बाद में श्री दुर्गा पूजा की। इस बीच पड़ रहे तीज के लिए ग्रामीण क्षेत्रों मैं तैयारी चालू हो चुकी है तो बियासी का काम पूरा कर लेने के बाद निंदाई का काम अंतिम चरण में है क्योंकि नहरों से पानी पहुंचने के बाद मिला अवसर किसान हाथ से निकलने नहीं देना चाहते। इसलिए समय रहते ज्यादा मजदूरी भुगतान में भी मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इन्हें भी मजदूरी भुगतान किया जाना है इसलिए कृषि उपज विक्रय की जा रही है।
धान में सियाराम तो दलहन में अरहर
कीमतों पर यदि नजर डाली जाए तो धान में इस समय सियाराम 21 सौ से 22 सौ रुपए के साथ सबसे आगे है। 1980 से 2190 रुपए के साथ एचएमटी और 1460 से 1750 रुपए के साथ महामाया क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर है। सरना हमेशा की तरह 1350 से 1400 रुपए के आस पास आकर ठहरा हुआ है। जबकि दलहन में 5550 रुपए के साथ अरहर अब भी शिखर पर है तो तिलहन में सरसों 4620 रुपए पर मजबूती के साथ जमा हुआ है। मसाला में धनिया 4460 रुपए के साथ मजबूती से डटा हुआ है।
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