अब पूरे साल मशरूम की फसल : 40 डिग्री टेंम्परेचर में तैयार होने वाला दूधिया मशरूम का छत्तीसगढ़ प्रवेश

2
IMG-20200808-WA0052

भुवन वर्मा बिलासपुर 8 अगस्त 2020


जगदलपुर- अब उमस भरी गर्मी में भी मशरूम की खेती संभव होने जा रही है। दक्षिण भारत में सफलता के साथ की जा रही दूधिया मशरूम पर हुए अनुसंधान में इसे छत्तीसगढ़ की जलवायु में तैयार किए जाने पर सफलता मिल चुकी है। अब इसके बीज कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से हासिल किए जा सकेगें।

मौसमी मशरूम की खेती करने वाले किसान अभी तक मात्र बटन मशरूम से ही परिचित हैं और इसी की ही फसल लेते रहे हैं लेकिन यह तापमान वृद्धि के दौरान अनुकूल उत्पादन नहीं दे पाता। ऐसे में मशरूम उत्पादक किसान बाद का पूरा समय सीजन के इंतजार में बिता देते हैं। नए अनुसंधान में मिली सफलता के बाद अब मशरूम उत्पादक किसान पूरे साल नई प्रजाति के दूधिया मशरूम की खेती कर सकेंगे और हासिल कर सकेंगे भरपूर आय। बशर्ते वे फसल चक्र परिवर्तन में मशरूम को भी शामिल कर पाए।

तापमान और उमस भरी गर्मी में भी

भारत की ही प्रजाति होने के बावजूद दूधिया मशरूम को ज्यादा पहचान दक्षिण भारत से ही मिली। दक्षिण भारत का तापमान हमेशा से उच्च तापमान वाला रहा है और ऐसी ही जलवायु मशरूम की इस प्रजाति को रास आती है। अपने छत्तीसगढ़ में शीत ऋतु के दिनों को छोड़ कर शेष महीनों में तापमान हमेशा से ज्यादा रहता है। औसतन हमारे प्रदेश के मैदानी इलाकों का तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता आया है और यही तापमान दूधिया मशरूम को रास आता है। इस दौरान उमस और नमी की मात्रा भी ज्यादा रहती है। यही जलवायु मशरूम की इस प्रजाति के लिए उपयुक्त है। बीच की अवधि में 30 से 40 डिग्री सेल्सियस का तापमान और 80 से 90 प्रतिशत नमी पर यह अनुकूल उत्पादन देती है।

क्या है दूधिया मशरूम

दूधिया मशरूम का आकार व रूप सफेद बटन मशरूम की ही तरह होता है। लेकिन यह बटन मशरूम से कहीं ज्यादा मांसल, लंबा और आधार मोटा होता है। कैप बहुत छोटी और जल्द खुलने वाली होती है। सबसे महत्वपूर्ण गुण इसमें यह है कि दूधिया मशरूम की टिकाऊ क्षमता काफी ज्यादा होती है याने इसे ज्यादा दिनों तक स्टोर करके रखा जा सकता है। जबकि मशरूम की दूसरी प्रजातियों में यह गुण नहीं होते। एक और महत्वपूर्ण गुण यह है कि यह 30 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी सफलता के साथ तैयार हो जाती है।

तैयार फसल की ऐसे पहचान

दूधिया मशरूम की फसल तैयार हो चुकी है इसकी पहचान की विधि बेहद आसान है। मशरूम का कैप याने ऊपरी सिरा पांच से 6 सेंटीमीटर की मोटाई में आ जाए तो यह संकेत मिलने लगता है कि कटाई के लिए मशरूम तैयार हो चुका है। कटाई के पहले कैप को घुमा कर तोड़ा जाए। शेष बचा तना का हिस्सा निचले हिस्से से अलग किया जा कर पैक कर लिया जाए। इस तरह दूधिया मशरूम तैयार है बाजार में विक्रय के लिए। इस दौरान कटाई के लिए उत्पादकता 100 प्रतिशत तक की संभावना है।

जितना माध्यम, उतना उत्पादन

30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच नमी 80 से 90 फ़ीसदी होने पर ली जाने वाली इस फसल की बेहतरीन उत्पादन के लिए एक और बात हैरानी में डालने वाली है वह यह है कि जिस पुआल, भूसा और मिट्टी के मिश्रण की मात्रा का वजन कितना होगा उतने ही वजन में दूधिया मशरूम की उत्पादकता हासिल की जा सकती है। इस तरह की विधि से उत्पादित दूधिया मशरूम तैयार होने के बाद उत्पादन लागत आती है 20 से ₹25 प्रति किलोग्राम जबकि विक्रय किए जाने पर 60 से 80 रुपए प्रति किलो की दर पर पैसे हासिल हो जाते हैं।
वर्जन

दक्षिण भारत में बहुतायत के साथ की जाने वाली दूधिया मशरूम की खेती अब छत्तीसगढ़ में भी की जा सकेगी। इसमें उमस भरी गर्मी में भी तैयार होने के गुण हैं। यानी जैसा तापमान अपने प्रदेश का है इसके लिए यह बेहद उपयुक्त है। इसके बीज कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से हासिल किए जा सकते हैं।

  • डॉक्टर सी एस शुक्ला , डीन, उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर

About The Author

2 thoughts on “अब पूरे साल मशरूम की फसल : 40 डिग्री टेंम्परेचर में तैयार होने वाला दूधिया मशरूम का छत्तीसगढ़ प्रवेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed