अब मनुस्मृति काल मे नही लौटा जा सकता : संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़

भुवन वर्मा बिलासपुर 23 जुलाई 2020
रायपुर । छत्तीसगढ़ सर्व हित संघ ने प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर लगातार मोर्चा खोलकर रखा है। सर्वहित संघ के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता करके अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण ना मिले और जिन अधिकारी -कर्मचारियों को प्रमोशन मिला है को उनके मूल पद पर रिवर्ट कराने के लिए लगातार माननीय उच्च न्यायालय के माध्यम से सरकार पर लगातार दबाव डालने का कोशिश किया जा रहा है।
सर्व हित संघ के बैनर पर छत्तीसगढ़ राज्य में 95% अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग एससी/एसटी /ओ बी सी मूलनिवासी समाज के हितों के खिलाफ लगातार षड्यंत्र कर रहा है। संयुक्त मोर्चा का मानना है यह सर्व हित संघ नहीं है यह मनुस्मृति संघ है जो संपूर्ण आरक्षण के खिलाफ है और वह नहीं चाहते कि देश के मूल निवासी समाज शासन, प्रशासन, शिक्षा, नौकरी, राजनीति में किसी भी तरह का भागीदारी हिस्सेदारी प्राप्त न कर पाये।
संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़ के बैनर पर समाज प्रमुखों जिनमें के पी खांडे पूर्व डिप्टी कलेक्टर प्रदेश अध्यक्ष गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी छत्तीसगढ़,डॉ जे आर सोनी महासचिव गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी छत्तीसगढ़,एस टोप्पो संयोजक उरांव आदिवासी समाज कल्याण संघ छत्तीसगढ़,एड रामकृष्ण जांगड़े मुख्य संयोजक संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़,रघु नंदन साहू संयोजक संयुक्त मोर्चा छ ग,श्रीराम पप्पू बघेल प्रदेश अध्यक्ष युवा विभाग गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी छत्तीसगढ़, चेतन चंदेल प्रवक्ता गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी छत्तीसगढ़,सुंदर जोगी पार्षद एवं शहर अध्यक्ष गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी छत्तीसगढ़ के सामाजिक प्रतिनिधियों ने संयुक्त विज्ञप्ति में कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण संपूर्ण आरक्षण का एक छोटा सा हिस्सा है। मनुस्मृति संघ चाहते हैं कि आरक्षित वर्ग के अधिकारी- कर्मचारी जिस पद पर भर्ती होते हैं उसी पद पर रिटायर(सेवानिवृत्त) हो जाये। इसके लिए मनुस्मृति संघ निरंतर षड्यंत्र करते रहते है।जिसमें मनुस्मृति समाज के ही बड़े बड़े अधिकारी एस सी /एस टी/ ओ बी सी समाज के अधिकारी- कर्मचारियों का गोपनीय चरित्रावली लिखते हैं। गोपनीय चरित्रावली के नाम से आरक्षित वर्ग के अधिकारी- कर्मचारियों को प्रताड़ित करते हैं अपमानित करते हैं और उन पर मानसिक दबाव बनाकर कार्य करवाते हैं।आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों-अधिकारियों के गोपनीय चरित्रवाली में विपरीत टिप्पणी भी लिखते है जिससे इन लोगों का प्रमोशन न हो पाये। जिसके कारण आरक्षित वर्ग के अधिकारी – कर्मचारियों को नौकरी कर पाना बहुत कठिन होता है। मनुस्मृति समाज के लोग चाहते है आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों- अधिकारियों को इतना प्रताड़ित करते हैं कि आरक्षित वर्ग के कर्मचारी- अधिकारी नौकरी छोड़ कर भाग जाए। आरक्षित समाज को यदि संवैधानिक सुरक्षा नहीं होता तो यह वर्ग न नौकरी कर पाता और न हीं सामान्य जीवन जी पाता।
छत्तीसगढ़ में एससी एसटी ओबीसी की आबादी 95% है इनके लिए 49. 5% आरक्षण का प्रावधान है और जो 3% मनुस्मृति समाज है उनके लिए 51.5% प्रतिशत अघोषित आरक्षण है। भारत सरकार ने सवर्णों को 10% आरक्षण दिया है के परिपालन में छत्तीसगढ़ सरकार ने 10% आरक्षण देने का घोषणा किया जिसका किसी ने कोई विरोध नहीं किया। किंतु 52% ओ बी सी समाज के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी ने 27% आरक्षण का घोषणा किया जिसके विरोध में 41 मनुस्मृति समाज के लोग माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में ओ बी सी समाज के आधिकारिक जनसंख्या के आंकड़े नही होने के मुद्दे पर माननीय न्यायालय से ओ बी सी आरक्षण पर रोक लगवा दिए। यहाँ यह गौर करने की बात है कि केंद्र सरकार ओ बी सी समाज का जातीय जनगणना नही कराना चाहता है और यही मनुस्मृति समाज न्यायालय से ओ बी सी समाज के जनसंख्या के आधिकारिक आकड़े नही होने के मुद्दे पर ओ बी सी आरक्षण पर रोक लगवाते है। यही इनका दोहरा चरित्र है सर्व हित की बात करते है और बहुसंख्यक एस सी/एस टी/ओ बी सी समाज का विरोध करते है।
छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रमोशन में आरक्षण के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में एस सी/ एस टी/ ओ बी सी समाज के क्वांटिफाइबल डाटा एकत्र करने के लिए श्री मनोज पिंगुआ प्रमुख सचिव के अध्यक्षता में 5 सदस्यों का एक समिति गठित किया है। इसके लिए समस्त आरक्षित वर्ग माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त कर रहा है।
संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़ ने कहा है कि मनुस्मृति संघ को यह समझना चाहिए की अब मनुस्मृति काल में नहीं लौटा जा सकता।यह बात अब सबको समझ लेनी चाहिये। आप लोग बात सर्व हित की तो करते है किन्तु एस सी/ एस टी /ओ बी सी समाज का विरोध क्यों करते है? क्या यह वर्ग सर्व में नहीं आता है? क्या यह लोग हिंदू नहीं हैं ? आप लोग हिंदू होकर हिंदू का विरोध क्यों करते हो? यह बात अब मूलनिवासी समाज अपने आप से प्रश्न करने लगा है कि हम हिन्दू है तो सवर्ण हिन्दू हमारा विरोध क्यो करता है?
हमारा विरोध कोई मुस्लिम सिक्ख, ईसाई तो नही करता है। संयुक्त मोर्चा ने कहा है जब आप हमारा विरोध करेंगे तो हमारा भी समाज मनुस्मृति समाज के विरोध में असहयोग आंदोलन प्रारंभ करेगा।
रामकृष्ण जांगड़े, एडवोकेट
मुख्य संयोजक
संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़
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