दृढ़ इच्छा शक्ति आत्मविश्वास एवं लगन का पर्याय – संदीप अग्रवाल सीईओ : दोनों भाई संदीप एवं सुमित को आईएएस अवार्ड तीन बार कर चुके हैं पीएससी पास

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बिलासपुर। मध्यमवर्गीय परिवार की सादगी, माता-पिता के संस्कार और निरंतर परिश्रम जब एक दिशा में जुटते हैं तो असाधारण उपलब्धियां जन्म लेती हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं बिलासपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल और दुर्ग नगर निगम के आयुक्त सुमित अग्रवाल। दोनों सगे भाई आज प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और प्रदेश के लिए गौरव बने गए हैं। खास बात यह है कि दोनों प्रशासनिक अफसर सगे भाई हैं और दोनों को आज एक साथ आईईएस आवार्ड हुआ। यह किसी भी माता-पिता या परिजनों के अलावा प्रदेशवासियों के लिए गौरवान्वित करने वाली बात है।

रायपुर तहसील में स्टाम्प वेंडर के रूप में कार्यरत उनके पिता के पास अक्सर अधिकारी आते-जाते थे। बचपन में बड़े अफसरों को नजदीक से देखने का प्रभाव दोनों भाइयों के मन में गहराई तक बैठ गया। तभी से प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना आकार लेने लगा। परिवार में दो भाई और दो बहन हैं, जिनमें संदीप अग्रवाल दूसरे नम्बर तथा सुमित उनसे तकरीबन साढे 6 साल छोटे हैं।उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद घर का माहौल पढ़ाई के अनुकूल रहा। रिश्तेदारी में भी कई लोग प्रशासनिक सेवाओं में रहे, जिससे प्रेरणा मिलती रही, लेकिन असली ताकत माता-पिता के संस्कार और अनुशासन बने। एक ही परिवार से दो प्रशासनिक अधिकारी बनना दुर्लभ उपलब्धि है। यह कहानी बताती है कि संघर्ष की जमीन से ही सफलता का वृक्ष फलता-फूलता है। संदीप और सुमित अग्रवाल की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा की रोशनी है।

दोनो भाइयों का प्रशासनिक सफर..

संदीप अग्रवाल का प्रशासनिक सफर विविध अनुभवों से भरा है। वे धमतरी में एसडीएम रहे, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के ओएसडी के रूप में कार्य किया, रायपुर में एसडीएम, गरियाबंद में फूड ऑफिसर और कवर्धा जिला पंचायत के सीईओ रहे। वर्तमान में वे बिलासपुर जिला पंचायत में सीईओ के रूप में कार्यरत हैं। वहीं सुमित अग्रवाल ने भी प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। सेंट्रल एक्साइज में सेवा देने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग सरगुजा में हुई। इसके बाद मुंगेली, बिलासपुर और कांकेर में दायित्व निभाते हुए वे वर्तमान में दुर्ग नगर निगम के कमिश्नर के पद पर कार्य कर रहे हैं। उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक दक्षता की सराहना की जाती रही

तीन बार किए पीएससी पास…

जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल की उपलब्धि उनकी विलक्षण प्रतिभा को दर्शाती है। उन्होंने तीन बार पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी क्षमता साबित की। प्रारंभ में वे अकाउंट सर्विस में चयनित हुए, इसके बाद सहायक संचालक हथकरघा और फिर डिप्टी कलेक्टर बने। निरंतर मेहनत और लगन से उन्होंने प्रशासनिक सेवा में मजबूत पहचान बनाई। उन्होने बताया कि 2004-05 में पीएससी की परीक्षा दी लेकिन उनके सफलता हासिल नही हुई। निरंतर प्रयास किया और जो हमारा सपना था उसे टूटने नही दिया लगातार प्रयास किया।

युवाओं के लिए संदेश….

युवाओं के लिए संदेश देते हुए संदीप अग्रवाल कहते हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में दृढ़ निश्चय हो तो सफलता निश्चित है। उनका चयन पांच वर्षों के लंबे इंतजार और निरंतर प्रयास के बाद हुआ। वे बताते हैं कि असफलताओं के बावजूद धैर्य नहीं खोना चाहिए और सपनों को टूटने नहीं देना चाहिए। इस उपलब्धि के लिए युवाओं के नाम पर संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से ठान ले तो सफलता मिलना तय है। इसलिए युवओं को एक लक्ष्य बनाकर चलना चाहिए। कभी हिम्मत नही हारनी चाहिए। हमारा पीएससी बहुत लंबा चला और पांच साल में सलेक्शन हुआ।

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