क्या होगा अगर RBI अनलिमिटेड नोट छापने लगे ? जानें, इसका इकोनॉमी पर असर?
RBI के हाथ में नोट छापने की ताकत है. फिर वह अनलिमिटेड नोट क्यों नहीं छापता है? क्या होगा अगर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अनलिमिटेड नोट छापने लगे तो? ये सारे सवाल आपके मन में भी आते हैं तो इन सभी सवालों के जवाब यहां जानिये. आइये आपको बताते हैं कि RBI अगर अनलिमिटेड नोट छापता है तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं.
आपका ये जानना जरूरी है कि आरबीआई नोट की वैल्यू के बराबर सोना या विदेशी संपत्ति संभाल कर रखता है. अगर आरबीआई रिजर्व से ज्यादा नोट छापना शुरू कर देगा तो उसके पास उन नोटों की कीमत चुकाने लायक गोल्ड और फॉरेन रिजर्व नहीं बचेंगे. इस स्थिति में देश आर्थिक संकट में डूब सकता है. कई देशों जैसे कि जिम्बाब्वे और वेनेजुएला में ऐसा हो चुका है, जहां ज्यादा पैसे छापने से उनकी अर्थव्यवस्थाएं ढह गईं.
करेंसी की वैल्यू घट जाएगी
अगर कोई देश बहुत ज्यादा पैसे छापता है, तो उसकी करेंसी की वैल्यू कम हो जाती है. इसका मतलब है कि इंपोर्ट महंगा हो जाएगा. इससे ट्रेड डेफिसिट और खराब हो जाता है. विदेशी निवेशकों का भरोसा कम हो जाता है.
बेकाबू महंगाई
जब ज्यादा पैसा उतनी ही चीजों और सेवाओं के पीछे भागता है, तो कीमतें तेजी से बढ़ती हैं. इससे महंगाई बढ़ती है और पैसे की खरीदने की शक्ति कम होती है. कई देशों जैसे कि जिम्बाब्वे और वेनेज़ुएला में ऐसा हो चुका है, जहां ज्यादा पैसे छापने से उनकी अर्थव्यवस्थाएं ढह गईं.
ज्यादा पैसा होगा तो काम नहीं करेंगे लोग
अगर लोगों को बिना काम किए मुफ्त में पैसा मिलता है, तो काम करने की इच्छा कम हो जाती है. अगर कम लोग प्रोडक्शन में योगदान करते हैं, तो सामान और सेवाओं की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है. यह डिमांड और सप्लाई के नियम को बिगाड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ती है.
डिमांड और सप्लाई में रुकावट
अगर प्रोडक्शन स्थिर भी रहता है, तो भी ज्यादा पैसे की सप्लाई से डिमांड बढ़ जाती है. जब डिमांड सप्लाई से ज्यादा हो जाती है, तो कीमतें बढ़ जाती हैं. इससे एक असंतुलन पैदा होता है, जहां कंज्यूमर प्रोडक्ट खरीद सकते हैं, लेकिन डिमांड को पूरा करना चुनौती बन जाता है.
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