भारत मे ओबीसी अब भी आईसीयू में : देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय में ओबीसी के एक भी प्रोफेसर नहीं

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भुवन वर्मा बिलासपुर 15 जुलाई 2020

कई कालेजों ने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

दिल्ली । विडंबना देखिए विश्वविद्यालयों में पिछडे वर्ग को 27% आरक्षण मिले लंबा समय बीत गया है, लेकिन पिछड़े वर्ग का आज भी एक भी प्रोफेसर के पद शिक्षक नहीं है। देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व शून्य है। अगर बात एसोसिएट प्रोफेसर की करें तो यहां भी पिछड़ा का शून्य प्रतिनिधित्व ही है। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर भी 15.85% ही नियुक्त हो सके हैं। जबकि पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व 27% होना चाहिए । वहीं अगर कुल तीनों एसोसिएट प्रोफेसर तथा प्रोफेसर को मिलाकर बात की जाए तो पिछड़े वर्ग को केवल 10.25% ही मिल पाई है। देश कुल 40 केंद्रीय विद्यालय में 17869 हजार पद हैं जिनमें पिछड़े वर्ग को केवल 1141 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ही भागीदारी मिल सकी है।

इसी को लेकर विजेंद्र कुमार अंबेडकर कॉलेज ,चमन सिंह, अचार्य नरेंद्र देव कॉलेज तथा अशोक कुमार यादव ,श्याम लाल कॉलेज के तैनात लोगों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को पत्र लिखा है। इन्होंने मांग की है कि इतने सालों के बाद भी इस वर्ग के साथ न्याय क्यों नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि अभी आरक्षण पूरा मिल भी नहीं पाया और समीक्षा शुरू हो गई। जो थोड़े बहुत लोग मुख्यधारा में आ ही पाए हैं ।सुनने में आ रहा है कि सरकार क्रीमी लेयर का दायरा बढ़ाकर उसे भी बंद करना चाहती है। जब तक पूरा कोटा ना मिल जाए इस तरह की बात करना बेमानी होगी। जब तक पिछड़े वर्ग को न्याय नहीं मिल जाता हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

ओमवीर यादव,नई दिल्ली की रपट

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