छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी वकील पर जताई नाराजगी: कहा-3 दिन में 2 पेज का जवाब क्यों नहीं दिया, वार्ड परिसीमन के खिलाफ याचिका पर हुई सुनवाई

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बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम में वार्डों के परिसीमन के खिलाफ याचिका की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील पर जमकर नाराजगी जताई। केस की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील जस्टिस पीपी साहू के सवालों का जवाब नहीं दे पाए।

उनका कहना था कि जब 26 जुलाई को याचिका की कॉपी उन्हें मिल गई है, तो तीन दिन में दो पेज का जवाब प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया। अब इस मामले की मंगलवार को भी सुनवाई होगी।

स्लम बस्तियों को विस्थापित किया गया

याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से तर्क दिया गया कि जिन स्लम बस्तियों को विस्थापित किया गया है और वहां के निवासियों को अलग-अलग वार्डों में शिफ्ट किया गया है। उनके लिए परिसीमन किया जा रहा है।

इसमें साल 2011 की जनगणना को आधार नहीं बनाया गया है। जस्टिस पीपी साहू ने कहा कि अर्जेंट मैटर पर सुनवाई चल रही है। तीन दिन पहले सरकारी वकील को याचिका की कॉपी मिल गई है। फिर भी उन्होंने शपथ पत्र के साथ जवाब नहीं दिया है।

मामले में आज भी होगी सुनवाई

शासन के जवाब के बाद जब कोर्ट ने पूछा कि क्या केवल उन्हीं वार्डों का परिसीमन किया गया है जहां स्लम बस्ती के लोग रह रहे हैं। इस पर शासन की तरफ से सरकारी वकील कोई जवाब नहीं दे पाए। नाराज कोर्ट ने कहा कि दंतेवाड़ा से जवाब नहीं आया। यह समझ में आता है, क्योंकि वहां मौसम खराब है और बारिश हो रही है, लेकिन आप लोग तो शहर में हैं। अर्जेंट मैटर की गंभीरता नहीं समझ रहे हैं।

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