छत्तीसगढ़ की राजधानी में ‘बीमारियों’ के ठेले: कहीं चटनी सड़ी, कहीं भिनभिनाती मंक्खियां, खराब खाने से फैला पीलिया-डायरिया, रोजाना 800 मरीज, 2 मौत

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रायपुर/ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सड़कों और चौपाटियों में ‘बीमारियों’ के ठेले लगे हैं। अधिकतर जगहों में खुले में बिकने वाले चाट, गुपचुप, मोमोस, समोसा, कचोरी, मंगोड़ी, जिनमें मक्खियां भिनभिनाती हैं। गंदे पानी का उपयोग हो रहा है। इस वजह से इस तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। गंदे पानी और खराब खाने से फैला पीलिया और डायरिया बढ़ रहा है।

पिछले पांच दिन में लगभग 200 दुकानों और ठेलों का सर्वे किया। इस दौरान इक्का-दुक्का दुकानों में ही कांच का बाक्स नजर आया। वहीं कहीं चटनी सड़ी, कहीं भिनभिनाती मंक्खियां मिलीं। इस तरह के खराब खाने और गंदे पानी से पीलिया-डायरिया तेजी से फैल रहा है। रोजाना 800 मरीज मिल रहे हैं। 2 लोगों की मौत हो चुकी है।

कहीं सड़ी चटनी तो कहीं भिनभिना रही थीं मक्खियां ​

इस दौरान गुढि़यारी में बासी और ताजा समोसा एक साथ रखा मिला। बीरगांव में ठेले पर टमाटर की चटनी खराब हो गई थी। रामनगर में ग्राहकों को दूषित पानी पिलाया जा रहा था। भनपुरी में कई जगह खाने के सामान खुले में रखे मिले। स्टेशन पर चना मसाला पर मक्खियां ​भिनभिना रही थीं

ठेले में खाने पीने की चीजें ढंकी नहीं दिखी

समोसे-कचोरी और मंगोड़ी को कांच के बॉक्स में नजर आईं। बाकी किसी भी दुकान या ठेले में खाने पीने की चीजें ढंकी नहीं दिखी। यहां तक कि नाले के किनारे पाटों में और ठेलों में जो चाट-गुपचुप जैसी चीजें बेची जा रही हैं।

वहां भी खाने-पीने की चीजों को मक्खियों​ से बचाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। हैरानी की बात दिखी की लोग भी बेफिक्र होकर चाट-गुपचुप, समोसा, जलेबी, मोमोस और मंगोड़ी खाते दिखे।​

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