डी.पी. विप्र महाविद्यालय में : भारतीय समाज में महिला उत्पीड़न विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का गरिमामय आयोजन

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डी.पी. विप्र महाविद्यालय में : भारतीय समाज में महिला उत्पीड़न विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का गरिमामय आयोजन

भुवन वर्मा बिलासपुर 17 जनवरी 2024

बिलासपुर।डी.पी. विप्र महाविद्यालय में 16 जनवरी को समाजशास्त्र विभाग एवं आई.क्यू.ए.सी. विभाग एवं हरिहर ऑक्सीजोन महिला विंग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी भारतीय समाज में महिला उत्पीड़न एक समाजशास्त्रीय अध्ययन विषय पर आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि शासकीय स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, दतिया (म.प्र.) के समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वासुदेव सिंह जादौन, विशिष्ट अतिथि प्रशासन समिति के वरिष्ठ सदस्य श्री राजकुमार अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि बुधिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती अर्चना झा, हरिहर ऑक्सीजोन के संयोजक भुवन वर्मा एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. श्रीमती अंजू शुक्ला ने की। मुख्य वक्ता डॉ. वासुदेव सिंह जादौन ने अपने उद्बोधन में महिलाओं के प्रति असमानताओं को बताया तथा समाज में जो नकारात्मक चीजे होती है वो असहजता उत्पन्न करती है। कहीं न कहीं घरेलू हिंसा संपूर्ण समाज के लिए अपराध है।

राजकुमार अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला प्रताड़ना मानव अस्तित्व के चिंतन से जुड़ा है तथा महिलाओं के लिए भावनाओं का महत्व है यह कहते हुए फिल्म जगत, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों में उन्हें महत्व देने की बात कही। डॉ. रश्मि बुधिया ने महिला उत्पीड़न के विषय में कहा कि महिला उत्पीड़न आईसबर्ग की तरह है। जिसका कुछ ही भाग सामने आ पाता है, बाकी दबी रह जाती है। उन्होने कहा कि महिलाओं की सहनशीलता उनकी शक्ति है न कि कमजोरी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती अर्चना झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारी शिक्षा में अनिवार्य शिक्षा के रूप में कानून की धाराएं अतिरिक्त विषय के रूप में रहनी चाहिये। उन्होने कहा कि समाज की प्रवृत्ति को बदलनी होगी अन्यथा यह हमारी ही गैर जिम्मेदारी होगी।

हरिहर ऑक्सीजोन के संयोजक श्री भुवन वर्मा ने कहा कि नारी उत्पीड़न के लिये नशा और शंका दोनों ही उत्तरदायी है एवं इन्हीं के कारण ज्यादातर समाज में महिला उत्पीड़न सामने दिखाई पड़ता है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. श्रीमती अंजू शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला एवं पुरूष एक दूसरे के पूरक है, विरोधी नहीं। समाजिक, धार्मिक, आर्थिक तथा अन्य सभी क्षेत्रों में उनकी सहभागिता बराबर रूप में होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि भारतवासी सामाजिक मूल्यों के आधार पर विचार करें तथा महिलाओं को सभी क्षेत्रों में उच्च स्थान प्राप्त हो साथ ही उन्होंने महिलाओं की अलग-अलग भूमिकाओं की व्याख्या की।

इस संगोष्ठी की संयोजक डॉ. श्रीमती साधना सोम विभागाध्यक्ष समाजशास़्त्र रहीं। कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सुषमा शर्मा एवं आभार प्रदर्शन आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ प्रो. ए.श्रीराम के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. संजय तिवारी, डॉ. विवेक अम्बलकर, डॉ. आभा तिवारी, डॉ. एम.एल. जायसवाल, डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ. आशीष शर्मा, श्रीमती तोषिमा मिश्रा, निधिष चौबे, श्री विश्वास विक्टर, डॉ. ऋचा हाण्डा, डॉ. किरण दुबे, डॉ. सुरूचि मिश्रा, श्री रूपेन्द्र शर्मा, शैलेन्द्र कुमार तिवारी, कु. सविता विश्वकर्मा, श्रीमती ज्योति तिवारी, सुचित दुबे, कु. कांची वाजपेयी, श्रीमती आभा वाजपेयी, प्रमोद नरेश, सगराम चन्द्रवंशी एन.सी.सी., एन.एस.एस. सुरेंद्र वर्मा हरीहर ऑक्सीजोन नाहिला विंग श्रीमती ममता गुप्ता ,गंगा साहू सुमित्रा कोरी ,श्रीमती किरण सिंह, नम्रता तिवारी, ज्योति शुक्ला ,राम आर्यन व समस्त कर्मचारीगण एवं छ.ग. के विभिन्न महाविद्यालयों से आये प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं की भागीदारी रही।

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