एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी हुई कारगर साबित: मरीज की स्थिति में आया बेहतर परिणाम ,कॉविड पर मध्य भारत का पहला प्रयोग रही सफल- जरूरतमंद के लिए डोज उपलब्ध केयर एंड क्योर हॉस्पिटल में
एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी हुई कारगर साबित: मरीज की स्थिति में आया बेहतर सकारात्मक परिणाम ,कॉविड पर मध्य भारत का पहला प्रयोग रही सफल- जरूरतमंद के लिए डोज उपलब्ध केयर एंड क्योर हॉस्पिटल में
भुवन वर्मा बिलासपुर 30 मई 2021
बिलासपुर । एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी कारगर साबित हुई ज्ञात हो कि ज्ञात हो कि अंचल अंचल के नगर के युवा डॉ सिद्धार्थ वर्मा क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ ने इस कोरोना संक्रमण काल में अंचल के वरिष्ठ चिकित्सक अपने माता पिता पर यह थेरेपी अपना कर मध्य भारत में पहला साहसिक कार्य किए । आज उसका परिणाम दिखने लगा है, डॉ एसके वर्मा एवं डॉ सुनीता वर्मा पर एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी की डोज कारगर साबित हुई और आज एचआरसीटी में वे संक्रमण से पूर्णता क्योर हो गए हैं । कोरोना से साहसिक लड़ाई में अंचल के प्रख्यात चिकित्सक डॉ एस के वर्मा एवं ख्यातिप्राप्त गायनेकोलॉजिस्ट डॉ सुनीता वर्मा एक असल योद्धा साबित हुए हैं ।
चूंकि वे स्वयं एक डॉ. दंपत्ति हैं और केयर एन क्योर हॉस्पिटल के संस्थापक है, उनका ट्रीटमेंट उनके पुत्र क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट और हॉस्पिटल डायरेक्टर डॉ सिद्धार्थ वर्मा और अन्य डॉक्टरों की देख रेख में चालू किया गया है ।
डॉ सिद्धार्थ वर्मा ने अपील करते हुए कहा कि अंचल के अन्य कोरोना संक्रमित के प्रारंभिक स्टेज वाले संपर्क कर एंटीबॉडी कॉकटेल पद्धति से अति शीघ्र कोरोना संक्रमण से मुक्त हो सकते हैं । वर्तमान में उनके केयर एंड क्योर हॉस्पिटल बिलासपुर में एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी की डोज उपलब्ध है ।विदित हो कि मेडिकल जगत में यह कैसीरिवीमैब, इमडेविमैब” के रूप में जानी जाती है ।
खास बात ये है कि इस मेडिसिन का सर्वप्रथम उपयोग उस वक्त अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर किया गया था और नतीजे काफी सकारात्मक थे। डॉ सिद्धार्थ वर्मा बताते हैं की उनके द्वारा वही दवा इस्तेमाल की गयी, डॉ सिद्धार्थ वर्मा इस दवा के इस्तेमाल के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि :
यह दवाई ऐसे मरीजों को दी जाती है जो की सामान्य या सामान्य से थोड़ा अधिक (माध्यम) रूप से ग्रसित है और जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है और जो हॉस्पिटल में भर्ती नहीं है लेकिन इन मरीजों में हाई रिस्क कम्प्लीकेशन होने की संभावना बहुत ज्यादा है और हाई रिस्क जैसे की मोटापा, ब्लड प्रेशर की बीमारी, डॉयबिटीज़ कैंसर किडनी की बीमारी, ट्रांसप्लांट पेशेंट, प्रतिरोधक क्षमता का कम करने वाली दवाओं पर निर्भर मरीज, हृदय रोग, सी ओ पी डी सिकलिंग के मरीज, जन्मजात हृदय रोग, अस्थमा, कैंसर पीड़ित शामिल हैं। इन मरीजों का कोरोना होने पर गंभीर होने का खतरा काफी रहता है, यह दवाई इन मरीजों के इलाज़ में किसी भी जटिलता के कारण हॉस्पिटल में भर्ती होने की आवश्यकता को 70% तक कम कर देती है। यहाँ यह ज्ञात होने की आवश्यक है की यह दवाई वैक्सीन की जगह नहीं ले सकती क्योंकि वैक्सीन का अपना एक अलग महत्त्व है।
विदित हो कि मरीज के अधिक सीरियस हो जाने के पश्चात् अथवा रिपोर्ट आने के 5-7 दिन के बाद इस दवा का उपयोग प्राणघातक हो सकता है। यह इंजेक्शन मरीज को आई सी यू केयर में रह कर डे केयर थैरेपी के रूप में लगवाना होता है और मरीज उसी दिन अपने घर वापस जा सकता है।
डॉ सिद्धार्थ वर्मा कहा कि यहाँ यह बताना आवश्यक है की की अभी हाल ही में भारत सरकार ने को इमर्जेन्सी उपयोग हेतु अनुमति प्रदान की है, इसके पहले यह दवा अमेरिका, सिंगापुर यूरोपीय देशो और दुबई में उपयोग किया जा रहा था, जो की वहां काफी कारगर सिद्ध हुई है और नतीजे काफी सकारात्मक मिले हैं, जिससे कोरोना के उपचार में एक नयी उम्मीद कि किरण दिखाई दी है।
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